Artwork text
आड़ी लेटी हुई लम्बी सतह।
सब कुछ धुला हुआ माटी-रंग।
क्षितिज की एक रेखा
संसार को चुपचाप बाँटती है।
बाएँ एक बड़ी चट्टान,
दाएँ दूर एक और पिंड।
लोगों ने इन दो चट्टानों को
भाई कहा।
पास न जा सकने वाले,
हाथ न थाम सकने वाले,
जीवन-भर एक ही जल में पाँव डाले
एक-दूसरे को देखते भाई।
इसे पृष्ठभूमि मत कहो।
चट्टान पीछे नहीं हटती।
मनुष्य से पहले आकर
आँखों के सामने खड़ी होती है।
पृष्ठभूमि नहीं।
शर्त है।
इस रंग,
इस हवा,
इस चट्टान के सामने
तभी मनुष्य मनुष्य बनता है।
संसार पहले वहाँ है,
और मनुष्य उसके सामने
अपने को सीखता है।
न पहुँच पाकर भी
एक ही समुद्र में खड़े रहना —
यह वह उन दो चट्टानों से सीखता है।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
