Artwork text
पीले आकाश के नीचे फूस का घर और पेड़, घोड़ा और मनुष्य एक ही जगह ठहरे हैं।
फूस का घर नीचा है। जेजू की हवा ऊँची चीज़ों पर वार करती है, इसलिए घर धरती पर नीचा झुक जाता है। वह शासन नहीं करता; बसेरा करता है।
झुकी पीठ वाला मनुष्य पत्थर की दीवार के भीतर देर तक ठहरता है। दीवार हवा को रोकती नहीं। दरारों से हवा को बहने देती है, इसीलिए गिरती नहीं।
इस चित्र का मनुष्य भी जगह घेरता नहीं। जगह का अंश बन जाता है।
बसना जीवन की जगह नहीं, संसार को सहने की मुद्रा है।
ऐसे पढ़ें तो शीर्षक फिर दिखता है: जो चला गया, उसकी जगह पर, उसी मुद्रा में ठहरना।
शायद यही स्मरण है।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
