कृतियाँ/FŪDO 002
संवाद
Dialogue
मूल जानकारी
| संख्या | FŪDO 002 |
|---|---|
| शीर्षक | संवाद대화Dialogue |
| वर्ष | 1986 |
कृति का पाठ
पाठ: Byun Joung Hoon
पूरा चित्र सूखी घास के रंग का है।
बीच में एक पेड़ खड़ा है। सारी शाखाएँ एक ओर झुकी हैं, और उस अदृश्य हवा की दिशा दिखाती हैं। अभी हवा न भी चले, वह झुकाव बीत चुकी हर हवा को कह देता है।
उसके नीचे ढलान पर एक घोड़ा और एक सिमटा हुआ मनुष्य है।
दोनों पास हैं, पर बात नहीं करते। घोड़ा दौड़ सकता है, पर दौड़ता नहीं; मनुष्य उठ सकता है, पर उठता नहीं। जा सकते हुए भी रुके रहना — यही साथी होने का भाव है।
दूर क्षितिज के नीचे एक छोटी नाव गुज़रती है, एक पक्षी नीचा उड़ता है। आकाश और समुद्र एक ही आभा में डूबे हैं।
इस चित्र के मनुष्य और घोड़ा एक ही हवा सहते हैं, एक ही जगह ठहरते हैं, एक साथ झुके हैं।
वे एक-दूसरे की व्याख्या नहीं करते। बस एक ही स्थानीय परिवेश में साथ-साथ टिके रहते हैं।
संवाद केवल मुँह से नहीं होता।
एक ही हवा को साथ सहना; एक ही मौन को साथ पार करना — यह भी संवाद है।
बिना शब्दों के भी, यही संवाद है।
शायद सबसे गहरा संवाद वही है, जिसमें शब्द नहीं होते।





