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BYUN SHI-JI · FŪDO 002

संवाद

Dialogue

1986 · Jeju, middle period

Byun Shi-Ji (변시지), Dialogue, 1986, painting from the middle Jeju period, shaped by wind and dried-grass colour.

Artwork text

पूरा चित्र सूखी घास के रंग का है।
बीच में एक पेड़ खड़ा है। सारी शाखाएँ एक ओर झुकी हैं, और उस अदृश्य हवा की दिशा दिखाती हैं। अभी हवा न भी चले, वह झुकाव बीत चुकी हर हवा को कह देता है।
उसके नीचे ढलान पर एक घोड़ा और एक सिमटा हुआ मनुष्य है।
दोनों पास हैं, पर बात नहीं करते। घोड़ा दौड़ सकता है, पर दौड़ता नहीं; मनुष्य उठ सकता है, पर उठता नहीं। जा सकते हुए भी रुके रहना — यही साथ का मन है।
दूर क्षितिज के नीचे एक छोटी नाव गुज़रती है, एक पक्षी नीचा उड़ता है। आकाश और समुद्र एक ही आभा में डूबे हैं।
इस चित्र के मनुष्य और घोड़ा एक ही हवा सहते हैं, एक ही जगह ठहरते हैं, एक साथ झुके हैं।
वे एक-दूसरे की व्याख्या नहीं करते। बस एक ही फ़ूदो के भीतर साथ-साथ टिके रहते हैं।
संवाद केवल मुँह से नहीं होता।
एक ही हवा को साथ सहना; एक ही मौन को साथ पार करना — यह भी संवाद है।
बिना शब्दों के भी, यही संवाद है।
शायद सबसे गहरा संवाद वही है, जिसमें शब्द नहीं होते।

Key context

ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।

चित्रकारजेजूजापानसियोलबिवोन (चांगदोकगुंग का गुप्त उद्यान)आधुनिक युगसमकालीन युगकलाललित कला