Artwork text
सब कुछ नीला है।
आकाश भी, समुद्र भी
एक ही आभा में ठंडे पड़े हैं।
तट की सूखी टहनियाँ
आपस में उलझी हुई
नीचे झुकी हैं।
जीवन-भर सही हुई हवा
उनके शरीर में बाकी है।
दूर समुद्र के बीच
एक चट्टानी द्वीप।
न पहुँच सकने की दूरी पर
छोटे बिंदु-सा तैरता है।
इसे दृश्य कहा जा सकता है।
पर दृश्य कहने के लिए
हवा बहुत पास है।
कब कपड़ों का छोर हिलने लगा,
साँस ठंडी हो चली।
देखने वाला
चौखट के बाहर नहीं है।
भीगी टहनियों के बीच से
वह भीतर आ चुका है।
फ़ूदो को
दूर से नहीं देखा जाता।
उसके भीतर खड़े होकर
वही हवा सहना,
साथ-साथ ठंडा होना — यही है।
वह द्वीप अभी दूर है।
पर हवा
यहाँ आ चुकी है।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
