Artwork text
चौड़ा समुद्र
सूखी घास के रंग में उठ खड़ा हुआ।
समुद्र के बीच
काली चट्टान गोल धँसी है,
और उसके बीचोंबीच
दो जन आमने-सामने सिमटे हैं।
एक-दूसरे के कंधे में सिर छिपाए
एक पिंड-से छोटे होकर जुड़े हैं।
पानी ठंडा है,
हवा बड़ी है।
पास है तो बस
एक-दूसरे की देह की ऊष्मा।
छोटा द्वीप,
छोटे दो जन।
पर इस तंग जगह में
सारे संसार का भार छू लिया जाता है।
हवा बड़ी है,
समुद्र चौड़ा है।
मनुष्य छोटा है।
इसीलिए और पास सिमटता है।
सहना
विशाल संसार को जीतना नहीं।
न ढह जाने भर को
एक-दूसरे पर देह टिकाना है।
कहते हैं, समुद्र हैन्यो के आँसू हैं।
वे आँसू समुद्र नहीं बन जाते,
क्योंकि टेकने का एक कंधा
अभी पास बचा है।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
