कृतियाँ/FŪDO 012
दोपहर
Noon
मूल जानकारी
| संख्या | FŪDO 012 |
|---|---|
| शीर्षक | दोपहर정오Noon |
| वर्ष | 2007 |
कृति का पाठ
पाठ: Byun Joung Hoon
सूर्य टँगा है, चित्र उजला है। पर हवा तेज़ है।
पेड़ एक ओर झुकता है, फूस का घर देह नीची करता है। बूढ़ा कमर झुकाए लाठी टेकता चलता है।
दिन उजला हो, तो भी जीवन की कठिनाई मिट नहीं जाती। दोपहर की चमकती रोशनी में भी मनुष्य झुकता है। जो दिन औरों को अच्छा दिखता है, वही उसके लिए सबसे कठिन दिन हो सकता है।
हवा मनुष्य को धकेलता समय है, न टाला जा सकने वाला इतिहास है, हर जीवित व्यक्ति पर आने वाला जीवन का भार है।
बूढ़ा हवा से लड़ता नहीं। देह नीची कर एक-एक क़दम आगे जाता है। गिरने से बचने को झुकता है, रुकने से बचने को लाठी टेकता है।
सहना हवा-रहित दिन की प्रतीक्षा नहीं। हवा के भीतर भी अपना रास्ता न खोना है।
वह आज भी जाता है। झुकी पीठ पर दोपहर का सूर्य उजला है।
34 भाषाओं में कृति-पाठ
한국어Korean
EnglishEnglish
日本語Japanese
简体中文Simplified Chinese
繁體中文Traditional Chinese
DeutschGerman
FrançaisFrench
EspañolSpanish
ItalianoItalian
PortuguêsPortuguese
РусскийRussian
NederlandsDutch
ΕλληνικάGreek
PolskiPolish
ČeštinaCzech
MagyarHungarian
УкраїнськаUkrainian
SvenskaSwedish
NorskNorwegian
DanskDanish
SuomiFinnish
Tiếng ViệtVietnamese
Bahasa IndonesiaIndonesian
ไทยThai
МонголMongolian
TagalogFilipino
Bahasa MelayuMalay
हिन्दीHindi
বাংলাBengali
العربيةArabic
TürkçeTurkish
עבריתHebrew
فارسیPersian
KiswahiliSwahili





