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दोपहर · 2007
Byun Shi-Ji, Noon, 2007 · दोपहर

कृतियाँ/FŪDO 012

FŪDO 012 · 2007 · जेजू, उत्तर काल

दोपहर

Noon

मूल जानकारी

संख्याFŪDO 012
शीर्षकदोपहर정오Noon
वर्ष2007

कृति का पाठ

पाठ: Byun Joung Hoon

सूर्य टँगा है, चित्र उजला है। पर हवा तेज़ है।
पेड़ एक ओर झुकता है, फूस का घर देह नीची करता है। बूढ़ा कमर झुकाए लाठी टेकता चलता है।
दिन उजला हो, तो भी जीवन की कठिनाई मिट नहीं जाती। दोपहर की चमकती रोशनी में भी मनुष्य झुकता है। जो दिन औरों को अच्छा दिखता है, वही उसके लिए सबसे कठिन दिन हो सकता है।
हवा मनुष्य को धकेलता समय है, न टाला जा सकने वाला इतिहास है, हर जीवित व्यक्ति पर आने वाला जीवन का भार है।
बूढ़ा हवा से लड़ता नहीं। देह नीची कर एक-एक क़दम आगे जाता है। गिरने से बचने को झुकता है, रुकने से बचने को लाठी टेकता है।
सहना हवा-रहित दिन की प्रतीक्षा नहीं। हवा के भीतर भी अपना रास्ता न खोना है।

वह आज भी जाता है। झुकी पीठ पर दोपहर का सूर्य उजला है।

34 भाषाओं में कृति-पाठ