Artwork text
पूरा चित्र
सूखी घास के रंग का समुद्र है।
बाएँ दूर
एक छोटी डोंगी।
दाएँ काले अंतरीप की नोक पर
एक मनुष्य खड़ा है।
नाव भी छोटी,
मनुष्य भी छोटा।
उनके बीच
समुद्र अनंत बिछा है।
पुकारूँ तो पहुँचेगी?
हवा आवाज़ ले जाती है।
हाथ हिलाऊँ तो दिखेगा?
दूरी इशारे मिटा देती है।
पर समुद्र
दोनों को बाँटने वाला जल नहीं।
गए हुए को देखती आँख और
लौटने की जगह न भूलने वाला मन —
उस चौड़े जल पर मिलते हैं।
न पहुँच पाकर भी
एक ही समुद्र में होना।
यही है
इस समुद्र के जोड़ने का ढंग।
गए और रह गए लोगों के बीच भी
ऐसा एक-एक समुद्र बिछा रहता है।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
