Artwork text
पूरा चित्र पीला जलता है।
धरती भी आकाश भी
एक ही आभा में डोलते हैं।
ऊपर एक महीन रेखा।
वही क्षितिज है।
उस रेखा के नीचे
एक नाव बिंदु-सी तैरती है।
नीचे उतरो तो
काली तूलिका हवा-सी लहराती है,
पास एक फूस का घर सिमटा है।
एक मनुष्य भी छोटा-सा खड़ा है।
वह बड़ा नहीं।
घर छोटा है, नाव दूर है।
पर डोलती चीज़ों के बीच
सबसे छोटा वही
इस चित्र का केंद्र है।
मनुष्य सदा कहीं खड़ा होता है।
पाँव तले धरती,
सिर पर आकाश,
पीठ पीछे हवा।
संसार जब लड़खड़ाता है
वह हवा में नहीं तैरता।
अंत तक धरती पर टिका रहता है।
ब्यून शिजी ने दृश्य नहीं खींचा।
डोलते संसार के सामने
फिर भी खड़े मनुष्य को खींचा।
आज भी कहीं
कोई वैसे ही खड़ा है।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
