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डगमगाता क्षितिज · 1986
Byun Shi-Ji, A Wavering Horizon, 1986 · डगमगाता क्षितिज

कृतियाँ/FŪDO 005

FŪDO 005 · 1986 · जेजू, मध्य काल

डगमगाता क्षितिज

A Wavering Horizon

मूल जानकारी

संख्याFŪDO 005
शीर्षकडगमगाता क्षितिज흔들리는 수평선A Wavering Horizon
वर्ष1986

कृति का पाठ

पाठ: Byun Joung Hoon

पूरा चित्र पीला जलता है।
धरती भी आकाश भी
एक ही आभा में डोलते हैं।
ऊपर एक महीन रेखा।
वही क्षितिज है।

उस रेखा के नीचे
एक नाव बिंदु-सी तैरती है।
नीचे उतरो तो
तूलिका के काले आघात हवा-से लहराते हैं,
पास एक फूस का घर सिमटा है।
एक मनुष्य भी छोटा-सा खड़ा है।
वह बड़ा नहीं।
घर छोटा है, नाव दूर है।
पर डोलती चीज़ों के बीच
सबसे छोटा वही
इस चित्र का केंद्र है।
मनुष्य सदा कहीं खड़ा होता है।
पाँव तले धरती,
सिर पर आकाश,
पीठ पीछे हवा।
संसार जब लड़खड़ाता है
वह हवा में नहीं तैरता।
अंत तक धरती पर टिका रहता है।
ब्यून शिजी ने दृश्य नहीं खींचा।
डोलते संसार के सामने
फिर भी खड़े मनुष्य को खींचा।
आज भी कहीं
कोई वैसे ही खड़ा है।

34 भाषाओं में कृति-पाठ