Artwork text
साँझ का समुद्र पीली रोशनी में शांत पड़ा है।
क्षितिज पर एक छोटी नाव दूर जाती है।
पास में लाठी टेकता मनुष्य और एक घोड़ा।
एक ही समुद्र में हैं, पर अलग खड़े।
पास होते हुए भी हर एक पहले ही एक द्वीप-सा हो गया है।
यह वियोग की रोशनी है—
जो जाते को देखने देती है,
और बचे को सहने देती है।
मनुष्य भी, घोड़ा भी
अंततः अपनी-अपनी वियोग-द्वीप रहते हैं।
फिर भी द्वीपों के बीच जलमार्ग होता है।
अलग खड़े होकर एक ही नाव देखना—
इस शाम की अंतिम संगति यही है।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
चित्रकारजेजूजापानसियोलबिवोन (चांगदोकगुंग का गुप्त उद्यान)आधुनिक युगसमकालीन युगकलाललित कला
