Artwork text
पूरा चित्र
सूखी रोशनी से लहराता है।
मानो जल हो,
मानो मैदान,
हर ओर पीली लय।
उसके बीच
एक घोड़ा और एक मनुष्य
काले पिंड की तरह उलझे
एक-दूसरे को थामे हैं।
ऊपर सूखा सूर्य है।
इस रोशनी में
बहुत देर प्रतीक्षा की हुई चीज़
चलना भूल जाती है।
मनुष्य और घोड़ा
एक-दूसरे पर टिके कठोर होते जाते हैं।
न जा पाते,
न छोड़ पाते,
अंततः एक पिंड पत्थर बन जाते हैं।
पत्थर होकर भी
प्रतीक्षा न छोड़ सकने वाले
मन का रूप।
प्रतीक्षा शरीर से
अधिक देर बची रही।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
चित्रकारजेजूकलाएकांतफूदो Fūdo (परिवेश और जलवायु)प्रतीक्षाआधुनिकतावादग्लोकलिज़्मकोरियाई चित्रकार
