Artwork text
सूरज है,
पर संसार उजला नहीं।
बाएँ दो लोग
एक-दूसरे पर टिके बैठे हैं,
और घोड़ा चुपचाप पास है।
बीच में एक मनुष्य
दो बाँहें आकाश की ओर उठाता है।
यह उल्लास की मुद्रा नहीं।
अँधेरे दिनों में भी
आशा न छोड़ने की मुद्रा है।
कौवा गुजरता है,
हवा नहीं रुकती।
फिर भी मनुष्य
अंत तक बाँहें नहीं गिराता।
आशा
उजले दिन पर विश्वास करना नहीं।
अँधेरे दिन में भी
आकाश की ओर हाथ उठाना है।
पास के लोग और घोड़ा
उस हाथ को देखते हैं।
देखती हुई आँखें हैं,
इसलिए हाथ नीचे नहीं आता।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
