Artwork text
समुद्र
सूखी घास के रंग में डोलता है।
ऊपर एक काला सूरज।
टँगा है,
पर कुछ भी प्रकाशित नहीं करता।
एक छोटी नाव लहरों पर है,
नीचे एक मनुष्य
टट्टू पर शरीर टिकाए है।
प्रकाश न हो तो भी
जीवन मिट नहीं जाता।
काले सूरज के नीचे भी
नाव तैरती है,
घोड़ा और मनुष्य एक-दूसरे पर टिकते हैं,
समुद्र अंत तक चलता रहता है।
आशा प्रकाश की प्रतीक्षा नहीं।
प्रकाश न हो तब भी
एक-दूसरे पर टिककर बचे रहना है।
सूरज काला हो जिस दिन,
साथ काला नहीं पड़ता।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
चित्रकारजेजूजापानसियोलबिवोन (चांगदोकगुंग का गुप्त उद्यान)आधुनिक युगसमकालीन युगकलाललित कला
