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जैसा है वैसा ही चलते जाना · 2006
Byun Shi-Ji, Going On as It Is, 2006 · जैसा है वैसा ही चलते जाना

कृतियाँ/FŪDO 054

FŪDO 054 · 2006 · जेजू, उत्तर काल

जैसा है वैसा ही चलते जाना

Going On as It Is

मूल जानकारी

संख्याFŪDO 054
शीर्षकजैसा है वैसा ही चलते जाना이대로 가는 길Going On as It Is
वर्ष2006

कृति का पाठ

पाठ: Byun Joung Hoon

बूढ़े की चाल भारी है। अकेला होता तो बैठ गया होता। पर टट्टू आगे जाकर लौटकर देखता है। दूर होते हुए उसे पुकारता है—जल्दी आओ। लाठी उसके हाथ को थामती है। लाठी धरती पर टिककर कहती है—उठो, एक बार और सहारा लो। समुद्र पर एक छोटी नाव। दिशा दिखाती है—इधर। क्षितिज के साथ चलती हुई, पीछे आओ कहती हुई पहले रास्ता बनाती जाती है। बूढ़ा समझता था कि वह अकेला चलता है। पर ऐसा नहीं था। घोड़ा पुकारता है, लाठी उठाती है, नाव रास्ता बनाती है। पूरा दृश्य उसे ले जा रहा था। जो लोग मानते हैं कि वे अकेले सहते हैं, उनके पास भी यूँ ही कुछ न कुछ साथ चल रहा होता है।

34 भाषाओं में कृति-पाठ