Artwork text
पास की रेत पर सफ़ेद लहरें टूटती हैं, और एक स्त्री तिरछी टिककर बैठी है।
पानी से निकली देह कुछ पल धरती पर सुस्ताती है। त्वचा भी, रेत भी, समुद्र भी एक ही आभा में डूबे हैं।
अभी-अभी पोता रंग होता तो अधिक स्पष्ट और हल्का होता।
पर यह रंग देर तक धूप पाकर, हवा सहकर बारीक हुआ है। एक ही आभा थी, पर उसके भीतर कई समय परतों में जुड़े हैं — इस स्त्री ने जितना गहरा पानी पार किया, उतने।
गहराई गाढ़ी होकर नहीं आती।
देर तक सहते-सहते बारीक होने के अंत में, तभी बनती है।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
चित्रकारजेजूजापानसियोलबिवोन (चांगदोकगुंग का गुप्त उद्यान)आधुनिक युगसमकालीन युगकलाललित कला
