Artwork text
एक झलक में देखो तो
बस पीला चित्र है।
क्षितिज की एक रेखा,
कुछ काली रेखाएँ।
पर देर तक देखो तो अलग है।
बीच में
एक हैन्यो भारी होकर औंधी पड़ी है।
वह देह
धीरे-धीरे उभरती है।
बाएँ दूर
एक छोटी नाव
बिंदु-सी क्षितिज पर टँगी है।
जल्दी देखो तो दिखती नहीं।
देर तक देखो तभी
समुद्र ने जो बहाया, वह दिखता है।
बारीक हुआ रंग
ख़ाली नहीं है।
न कहा गया दुख
उसके भीतर स्रवित है।
देर तक निहारना
बारीक हुए रंग में
पुरानी रुलाई ढूँढ़ लेना है।
मनुष्य भी वैसा है।
जल्दी देखो तो चूक जाओ,
देर तक देखो तभी
उसके भीतर की रुलाई दिखती है।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
