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BYUN SHI-JI · FŪDO 038

आत्म-चित्र

Self-Portrait

1944 · Japan years

Byun Shi-Ji (변시지), Self-Portrait, 1944, painting from the Japan period, shaped by wind and dried-grass colour.

Artwork text

एक युवा चेहरा धुँधली पृष्ठभूमि के आगे तैरता है।
सँवारकर पीछे किए बाल, काला सूट, थोड़ी तिरछी टाई।
आँखें सामने नहीं देखतीं। कुछ देखते हुए भी, यहाँ नहीं, किसी दूर की ओर हैं।

उन आँखों में अभी न कहे गए सपने और युवा दिनों का दुख साथ हैं। होंठ कसकर बंद हैं, पर उनके भीतर आगे खींचे जाने वाले असंख्य शब्द छिपे हैं।
अनजानी धरती पर वह अपना चेहरा चुपचाप देखता है। छोड़ आई जगह और अभी न पहुँची जगह के बीच, तूलिका से अपने को खड़ा करता है।
उसने जो खींचा, वह युवा दिनों का रूप नहीं। संसार में अकेले फेंके गए अपने अस्तित्व का पहला चेहरा है।
वह लगन पहले ही, बिचली नज़र में शुरू हो चुकी थी।
यह चेहरा दूर के भविष्य में ख़ाली मैदान में अकेला खड़ा बूढ़ा बनेगा — यह तब वह नहीं जानता था।
बस आँखें पहले ही, उस दूर को देख रही थीं।

Key context

ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।

चित्रकारजेजूजापानसियोलबिवोन (चांगदोकगुंग का गुप्त उद्यान)आधुनिक युगसमकालीन युगकलाललित कला