Artwork text
दृश्य खींचकर देखा तो
कोई बंधाव नहीं था।
इसलिए एक मनुष्य रख दिया।
बड़ा नहीं।
बिना नाम के।
बस एक बिंदु-सा।
चित्र को थामने के लिए
रखा था।
चेहरा नहीं है।
सिर झुकाए मनुष्य।
लाठी टेके बूढ़ा।
दृश्य स्वामी था,
मनुष्य सजावट।
पर अजीब बात हुई।
वह छोटा मनुष्य
पूरे चित्र पर छाने लगा।
सौवें हिस्से से भी छोटे आकार में,
बाक़ी सबको अपने अधीन कर लिया।
एक बिंदु।
वह बिंदु जितना छोटा,
एकांत उतना गहरा।
लोगों ने कहा —
वह मनुष्य, ठीक स्व-चित्र-सा लगता है।
उसने मना नहीं किया।
इस एक वाक्य से
सब साफ़ हो गया।
वह नामहीन मनुष्य,
हर कोई था,
और अंत में
वह चित्रकार ही था।
चित्र थामने को रखा एक बिंदु,
जीवन-भर उसी को थामे रहा।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
