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BYUN SHI-JI · FŪDO 034

फिर से जुड़ी राह

The Path Rejoined

1998 · Jeju, late period

Byun Shi-Ji (변시지), The Path Rejoined, 1998, painting from the late Jeju period, shaped by wind and dried-grass colour.

Artwork text

ब्यून शिजी की रेखा को चुपचाप निहारो, तो पता चलता है कि वह रेखा एक-सी नहीं है।
गहरी होकर हल्की होती है। मोटी होकर पतली होती है। कहीं टूटने-सी पतली, कहीं फिर जीकर मोटी।
एक ही रेखा के भीतर उतार-चढ़ाव है।
यह जीवन की रेखा है। जीवन भी एक-सा नहीं। बलवान समय होता है, थका समय होता है। स्पष्ट समय होता है, धुँधला समय होता है। टूटने-सा लगता है, फिर जुड़ जाता है।
सबसे अधिक मन को छूता है वह ठौर जहाँ रेखा टूटने-सी लगती है। जहाँ वह लगभग मिट जाने भर पतली हुई। वहाँ हम साँस रोक लेते हैं।
टूट जाएगी?
पर रेखा टूटती नहीं। पतली होकर भी जुड़ी रहती है। और फिर जी उठती है।
यही सहने का रूप है। सहना सदा बलवान नहीं होता। सहने में टूटने-सा एक क्षण होता है। जब लगे कि और नहीं झेला जाएगा। पर न टूटकर, पतले ही सही, चलते रहना। यही सहना है।
मोटे जुड़े रहना ही जीवन नहीं। टूटने-सा जुड़ा रहना भी जीवन है। शायद वही अधिक गहरा जीवन है।
किसी की रेखा भी इस समय कहीं पतली हो रही होगी। टूट नहीं रही। बस पतली हो रही है।

एक ही रेखा के भीतर, एक पूरा जीवन समाया है।

Key context

ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।

चित्रकारजेजूजापानसियोलबिवोन (चांगदोकगुंग का गुप्त उद्यान)आधुनिक युगसमकालीन युगकलाललित कला