Artwork text
प्रणाम आकाश और समुद्र की ओर जाता है,
आँखें बार-बार दूर तैरती नाव की ओर।
प्रार्थना देवता को, मन नाव को।
एक ही मनुष्य में दो ओर बँट जाता है।
वह छोटी नाव सीमा पार करते मनुष्य का काम है,
यह चट्टान उसके सकुशल होने की प्रार्थना की जगह है।
जो माँगा जा सकता था, सब माँग लिया।
फिर भी मन नहीं ठहरता,
प्रार्थना ख़त्म होने के बाद भी
आँखें समुद्र से नहीं लौटतीं।
अंतहीन समुद्र और अकेली धरती के बीच,
एक प्रार्थना गए हुए को और रह गए को जोड़ती है।
मनुष्य मनुष्य के लिए जो कर सकता है,
उसका सबसे पुराना काम
यही था — यों दोनों हाथ जोड़ना।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
