Artwork text
नीचे टीले के छोर पर, एक घोड़ा काली रूपरेखा में सिमटा खड़ा है।
यहाँ कोई ख़ास घटना नहीं। बस एक रंग टीले, समुद्र और आकाश को एक साथ रँग देता है।
ब्यून शिजी के लिए यह रंग चित्र बनाने का मात्र रंग नहीं था।
यह सूखी घास का रंग पोतना ही जेजू को बुलाना था। तूलिका जब-जब चित्र को छूती, उस धरती की धूप और हवा साथ चली आती।
वीराने के छोर का घोड़ा भी, उसके नीचे समुद्र भी, एक ही रंग में एक ही फ़ूदो साँस लेते हैं।
यह रंग दृश्य को ढकता नहीं। फ़ूदो को उजागर करता है।
यह रंग ही यह धरती है।
उसने जीवन-भर एक रंग नहीं छोड़ा, इसका कारण यही है। रंग बदलना, उसके लिए, अपनी जगह छोड़ देना था।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
