Artwork text
कविता
समुद्र उठ खड़ा होता है।
एक डोंगी की नियति के सामने
आकाश रुलाई भरे
नीचे देखता है।
घर के भीतर मनुष्य
देख नहीं पाता, सिमट जाता है,
अंतरीप पर का घोड़ा
भटकती नाव से
आँख नहीं हटा पाता।
संसार की सबसे बड़ी चीज़ें
सबसे छोटी एक चीज़ का
कुछ न कर पाकर
साँस रोक लेती हैं।
बल से तो
समुद्र नाव को निगल सकता है।
पर मन से
उस एक नाव का कुछ न कर पाकर
आकाश रोता है।
एक छोटे अस्तित्व के सामने
समुद्र भी, आकाश भी, धरती भी
कुछ नहीं कर पाते।
हवा के सामने सारा संसार
एक पल
साँस रोक लेता है।
जिससे आँख नहीं हटती, वैसी एक नाव
हर मन में
एक-एक होती है।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
