Artwork text
एक पेड़
ऊपर उठते-उठते
सिरे पर सब
एक ओर खिंच जाता है।
रेखा रूप का पीछा नहीं करती।
हवा के पीछे खिंची है।
आकाश भी एक ओर बहता है,
घास भी एक ओर लेटती है,
एक पक्षी भी
उसी बहाव में बहता है।
मनुष्य घोड़े की पीठ धकेलते हुए
देह झुकाता है।
बाँधने वाली रेखा
सामान को खड़ा करके तोड़ देती है।
बहा ले जाने वाली रेखा
सामान को जिला देती है।
हवा की खींची रेखा के भीतर
सब कुछ
एक ही दिशा में सहता है।
रोका नहीं, इसलिए
कुछ भी टूटा नहीं।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
चित्रकारजेजूजापानसियोलबिवोन (चांगदोकगुंग का गुप्त उद्यान)आधुनिक युगसमकालीन युगकलाललित कला
