कृतियाँ/FŪDO 086
ललक
Longing
मूल जानकारी
| संख्या | FŪDO 086 |
|---|---|
| शीर्षक | ललक그리움Longing |
| वर्ष | 1985 |
कृति का पाठ
पाठ: Byun Joung Hoon
जो चित्रकार जीवन-भर समुद्र किनारे अकेला खड़ा रहा,
उसने जिन दो लोगों को सबसे पास रखना चाहा,
उन्हें पेड़ों के रूप में चित्रित किया।
उन्हें आदर से फिर अपने पास रखा,
और उनके नीचे
अपने को बच्चे की तरह बैठाया।
पेड़ की जड़ के पास।
इतना निकट कि हाथ बढ़ाओ तो छू लो।
पास रखकर भी
न छू सकने वाले लोग याद आते हैं।
वे पास नहीं थे,
इसलिए उसने उन्हें चित्र में खड़ा किया।
छू नहीं सकता था,
इसलिए उनके चरणों के पास बैठ गया।
जिन नामों को पुकार नहीं सकता,
उन्हें पेड़ कहकर पुकारते हुए,
वह बहुत देर
उनके नीचे ठहरता है।
सूरज ठंडा पड़ जाए,
अँधेरा उतर आए,
फिर भी नहीं जाता।
क्योंकि वह पुत्र है।
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