Artwork text
समुद्र में उतरती
एक काली रेखा।
रास्ता नहीं,
एक आघात है।
सूखा आघात।
पर उसका सिरा
अब भी भीगा है।
जाती नाव
क्षितिज पार कर
दिखाई नहीं देती।
घाट के अंत पर
एक गठरी।
गाँठ
बँधी की बँधी है।
बारिश गुज़री।
धूप गुज़री।
हवा गुज़री।
गाँठ
न खुली।
एक कौवा एक बार
बैठा और उड़ गया।
सूखी घास का रंग
थोड़ा और फीका हुआ।
इस बीच
कितनी गर्मियाँ और
कितनी सर्दियाँ।
सब सूखते रहे,
केवल प्रतीक्षा
न सूखी।
उसके पास
एक मनुष्य बैठा है।
गठरी की तरह।
बिना खुले।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
चित्रकारजेजूजापानसियोलबिवोन (चांगदोकगुंग का गुप्त उद्यान)आधुनिक युगसमकालीन युगकलाललित कला
