Artwork text
आकाश ऊँचाई पर एक सूर्य है।
दूर समुद्र में एक नाव।
बीच में बहुत देर से न हिला हुआ चट्टानी द्वीप,
और उसकी ढलान पर एक घोड़ा अकेला खड़ा है।
नीचे दो घर हैं।
एक घर दरवाज़ा बंद कर बीते दिनों को समेटे है।
दूसरा भीतर से खाली है और अभी न आए व्यक्ति की प्रतीक्षा करता है।
दोनों घरों को घेरती पत्थर की दीवारें जुड़ती हैं, फिर अलग होती हैं;
रोकती लगती हैं, फिर रास्ता दे देती हैं।
उनके बीच से एक बूढ़ा लाठी टेकता हुआ आता है।
सूरज है, चट्टान ठहरी है, घोड़ा प्रतीक्षा में है, घर खाली हैं।
केवल बूढ़ा चलता है।
कौन-सा घर सही है, कोई नहीं बताता।
बंद दरवाज़े के भीतर भी जीवन है,
और खुले खाली कमरे में भी अनजिया समय है।
बूढ़ा दोराहे पर खड़ा है।
पर रास्ता पहले से रास्ता नहीं था।
वह जिस ओर शरीर मोड़ेगा,
वहीं एक रेखा रास्ता बनेगी,
और एक खाली घर उसका निवास हो जाएगा।
जीवन दिए हुए उत्तर को ढूँढ़ना नहीं।
दो घरों के बीच खाली जगह चुनकर
उसे अपनी ऊष्मा से भरना है।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
