Artwork text
घर खाली है।
समुद्र किनारे अकेला रह गया।
मनुष्य पहले ही
समुद्र पार जा रहा है।
पेड़ बाँह उठाकर
समुद्र पर लंबी फैलाता है।
जाओ भले।
दूर का रास्ता सकुशल हो।
उसके नीचे
चट्टान हाथ खोलती है।
पाँचों उँगलियाँ फैलाकर
चुपचाप समुद्र की ओर रहती है।
यह हाथ हिलाता नहीं।
यह विदा देने का हाथ नहीं,
लौटने वाले को प्रतीक्षा करता हाथ है।
कभी दूर समुद्र से लौटे तो
सबसे पहले कसकर पकड़ने के लिए।
पेड़ जाने की ओर हिलता है,
चट्टान लौटने की ओर खुली है।
एक विदा करता है,
एक प्रतीक्षा।
समुद्र किनारे रहने का मन यही है—
जाते जानकर भी विदा करना,
लौटेगा या नहीं जाने बिना भी प्रतीक्षा करना।
सूरज ढले, समुद्र अँधेरा हो,
बाँह हिलना नहीं छोड़ती,
हाथ खुलना नहीं रोकता।
एक खाली घर
उन दोनों के बीच बचा रहकर
आज भी समुद्र देखता है।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
