Artwork text
मैं धरती पर लेटकर सब भार रख देता हूँ—
जीए हुए दिनों की थकान भी,
गलत चुने रास्तों का पछतावा भी।
एक कौवा चुपचाप मुझे देखता है।
उसकी काली आँखों में न निर्णय है, न प्रश्न।
दुनिया बार-बार पूछती है कि मैं कौन हूँ,
पर कौवा नहीं पूछता।
वह बस पास रहता है,
मुझे अकेला नहीं रहने देता।
बहुत देर देखने पर मैं कौवे जैसा हो जाता हूँ,
और कौवा मेरे जैसा।
एक ही धरती पर,
एक ही आकाश देखते हैं।
सूर्य ढलने पर भी मन थोड़ा हल्का हो जाता है।
बिना बोले एक-दूसरे का एकांत जानना—
यही कौवे और मेरी बातचीत है।
बिना पूछे पास रहना।
मनुष्य के लिए भी यही सबसे कठिन,
और सबसे कृतज्ञ करने वाली बात है।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
