Artwork text
मैदान में लाल सूर्य धुँधला फैलता है।
उसके नीचे सूखी डालियाँ एक पंक्ति में खड़ी हैं।
मनुष्य भी, बैल भी, मिट्टी के रंग में डूबे हैं,
जैसे धरती के साथ एक शरीर हो गए हों।
कौन खेत जोतता है और कौन खिंचता है,
कह पाना कठिन है।
दोनों एक ही दिन को जोत रहे हैं।
इस एक दृश्य में
अब तक देखे सारे रंग समा गए हैं।
न मरकर भी टिके रहने का रंग।
मिट्टी नहीं, समय बन चुका रंग।
लुप्त हुआ-सा, फिर भी अंत तक साँस लेता रंग।
इस धरती पर जो बहुत देर तक सहता रहा,
अंततः वही रंग पाता है।
सूखी घास का रंग वह जीवित रंग है
जो जीवन के बहुत देर तक सहने के बाद भी
अंत तक बचा रहता है।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
