Artwork text
दुकान की चौकी पर चार मछलियाँ रखी हैं,
मानो समुद्र का उपहार हों।
माँ और बच्चा चुप हैं।
दोनों अपने-अपने विचार में डूबे हैं।
साथ बैठे हैं, फिर भी दो छोटे द्वीप।
वे उस ग्राहक की प्रतीक्षा करते हैं जो नहीं आता।
माँ के मन में चिंता उतरती है।
बच्चे की आँख दूर क्षितिज के छोर पर
एक नाव का पीछा करती है।
उस रेखा के पार पिता है।
एक नाव पानी पर तैरती है।
वह भी व्यापक समुद्र के बीच एक छोटा द्वीप है।
पिता भी मौन है।
जाल खींचता है, फिर खींचता है।
हवा दिशाहीन चलती है।
फिर भी चप्पू नहीं छोड़ता।
वे चार मछलियाँ उसके हाथों से निकलकर
इस किनारे पर रखी हैं।
आज के भोजन का यही कारण है।
अचानक वह सिर उठाता है।
क्षितिज के अंत पर धुँधला एक बिंदु।
दिखे न दिखे, वह जानता है।
वहाँ पत्नी है, बच्चा है।
उसी क्षण इस किनारे का बच्चा भी उसी रेखा को देखता है।
दो आँखें एक ही रेखा पर मिलती हैं,
एक-दूसरे को जाने बिना।
क्षितिज दो लोगों के बीच की दूरी है।
न छू सकने वाली, पर न टूटने वाली रेखा।
इस ओर माँ नाव को देखती है,
उस ओर पिता भूमि को।
एक-दूसरे को न देख पाते हुए भी
वे एक ही रेखा देखते हैं।
मछलियाँ चुप हैं।
पर वे गहरे समुद्र की कथा लाती हैं—
पिता का पसीना, परिवार का भोजन,
और लौटने का समय।
मौन जितना लंबा होता है,
प्रतीक्षा उतनी गहरी।
छोटी दुकान के सामने
परिवार का एक दिन बहता रहता है।
किसी के कदम ठहरने तक,
आज भी दिन यूँ ही बीतता है।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
