कृतियाँ/FŪDO 043
माँ और मछली
Mother and Fish
मूल जानकारी
| संख्या | FŪDO 043 |
|---|---|
| शीर्षक | माँ और मछली어머니와 생선Mother and Fish |
| वर्ष | 1979 |
कृति का पाठ
पाठ: Byun Joung Hoon
दुकान की चौकी पर चार मछलियाँ रखी हैं, मानो समुद्र का उपहार हों। माँ और बच्चा चुप हैं। दोनों अपने-अपने विचार में डूबे हैं। साथ बैठे हैं, फिर भी दो छोटे द्वीप। वे उस ग्राहक की प्रतीक्षा करते हैं जो नहीं आता। माँ के मन में चिंता उतरती है। बच्चे की आँख दूर क्षितिज के छोर पर एक नाव का पीछा करती है। उस रेखा के पार पिता है। एक नाव पानी पर तैरती है। वह भी व्यापक समुद्र के बीच एक छोटा द्वीप है। पिता भी मौन है। जाल खींचता है, फिर खींचता है। हवा दिशाहीन चलती है। फिर भी चप्पू नहीं छोड़ता। वे चार मछलियाँ उसके हाथों से निकलकर इस किनारे पर रखी हैं। वह एक वक़्त का भोजन ही आज की मेहनत का कारण है। अचानक वह सिर उठाता है। क्षितिज के अंत पर धुँधला एक बिंदु। दिखे न दिखे, वह जानता है। वहाँ पत्नी है, बच्चा है। उसी क्षण इस किनारे का बच्चा भी उसी रेखा को देखता है। दो निगाहें एक ही रेखा पर मिलती हैं। दोनों को इसका पता नहीं। क्षितिज दो लोगों के बीच की दूरी है। न छू सकने वाली, पर न टूटने वाली रेखा। इस ओर माँ नाव को देखती है, उस ओर पिता भूमि को। एक-दूसरे को न देख पाते हुए भी वे एक ही रेखा देखते हैं। मछलियाँ चुप हैं। पर वे गहरे समुद्र की कथा लाती हैं— पिता का पसीना, परिवार का भोजन, और लौटने का समय। मौन जितना लंबा होता है, प्रतीक्षा उतनी गहरी। छोटी दुकान के सामने परिवार का एक दिन बहता रहता है। किसी के कदम ठहरने तक, आज भी दिन यूँ ही बीतता है।





