Artwork text
चौड़े समुद्र में सफ़ेद लहरें टकराती हैं।
काली चट्टान समुद्र में सिर निकालती है, और उसकी धार पर एक घोड़ा और पेड़ पंक्ति में खड़े हैं।
चट्टानों के बीच एक सफ़ेद धार बहती उतरती है, दूर हल्लासान नीचा उठा है।
दाएँ पानी के किनारे एक मनुष्य छोटा-सा सिमटा है।
हवा से मिलने के रास्ते दो हैं। भिड़ना, या साथ चलना।
जो तना खड़ा है, वह पहले टूटता है। धार के पेड़ हवा के साथ-साथ लेट जाते हैं। वे हारते नहीं, जीने का पक्ष चुनते हैं।
सिमटा मनुष्य भी वैसा ही। सिमटना लज्जा की मुद्रा नहीं। बड़ा पेड़ टूट जाए, तो भी सिमटा हुआ बच जाता है।
सहना हवा को जीतना नहीं। न टूटने भर को साथ-साथ झुकना है।
यों झुककर, अंत में बचा रहता है।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
