कृतियाँ/FŪDO 020
तूफ़ान में समुद्र
The Sea in Storm
मूल जानकारी
| संख्या | FŪDO 020 |
|---|---|
| शीर्षक | तूफ़ान में समुद्र폭풍의 바다The Sea in Storm |
| वर्ष | 1993 |
कृति का पाठ
पाठ: Byun Joung Hoon
हवा ने
एक पूरा पेड़ झुका दिया।
डालें भी पत्ते भी
सब एक ओर झुक गए।
जंगली घास
सफ़ेद धारियाँ बनकर लेट जाती हैं।
एक भी पौधा उलटा नहीं,
सब उसी ओर।
एक घोड़ा और
एक बूढ़ा
देह पास-पास किए खड़े हैं।
घोड़े की ऊष्मा मनुष्य में उतरती है,
मनुष्य का हाथ घोड़े की गर्दन पर टिकता है।
एक फूस का घर
पत्थर की दीवार के भीतर देह नीची करता है।
लेट जाना
हारना नहीं।
हवा को देह सौंपने की रीति है।
घास लेटती है,
पेड़ झुकता है।
बूढ़ा घोड़े के पास
अंत तक पाँव धरती पर टिकाए रखता है।
हवा थमे
तो घास फिर उठती है।
एक भी पौधा छूटे बिना,
जहाँ लेटी थी, वहीं से।
सहने का अर्थ
न गिरना नहीं,
फिर उठने की शक्ति
धरती में छोड़ रखना है।
34 भाषाओं में कृति-पाठ
한국어Korean
EnglishEnglish
日本語Japanese
简体中文Simplified Chinese
繁體中文Traditional Chinese
DeutschGerman
FrançaisFrench
EspañolSpanish
ItalianoItalian
PortuguêsPortuguese
РусскийRussian
NederlandsDutch
ΕλληνικάGreek
PolskiPolish
ČeštinaCzech
MagyarHungarian
УкраїнськаUkrainian
SvenskaSwedish
NorskNorwegian
DanskDanish
SuomiFinnish
Tiếng ViệtVietnamese
Bahasa IndonesiaIndonesian
ไทยThai
МонголMongolian
TagalogFilipino
Bahasa MelayuMalay
हिन्दीHindi
বাংলাBengali
العربيةArabic
TürkçeTurkish
עבריתHebrew
فارسیPersian
KiswahiliSwahili





