Artwork text
हवा ने
एक पूरा पेड़ झुका दिया।
डालें भी पत्ते भी
सब एक ओर बह गए।
घास की पंक्तियाँ
सफ़ेद धारियाँ बनकर लेट जाती हैं।
एक भी पौधा उलटा नहीं,
सब उसी ओर।
एक घोड़ा और
एक बूढ़ा
देह पास-पास किए खड़े हैं।
घोड़े की ऊष्मा मनुष्य में उतरती है,
मनुष्य का हाथ घोड़े की गर्दन पर टिकता है।
एक फूस का घर
पत्थर की दीवार के भीतर देह नीची करता है।
लेट जाना
हारना नहीं।
हवा को देह सौंपने की रीति है।
घास लेटती है,
पेड़ झुकता है।
बूढ़ा घोड़े के पास
अंत तक पाँव धरती पर टिकाए रखता है।
हवा थमे
तो घास फिर उठती है।
एक भी पौधा छूटे बिना,
जहाँ लेटी थी, वहीं से।
सहने का अर्थ
न गिरना नहीं,
फिर उठने की शक्ति
धरती में छोड़ रखना है।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
