Artwork text
जीवन-भर उसने प्रस्थान चित्रित किया।
खाली घर। जाती नाव। वे चीज़ें जो लौटती नहीं।
हर चित्र में कोई न कोई जा रहा था।
जब उसने खाली घर बनाया,
वह उस घर का स्वामी था।
जब उसने जाती नाव बनाई,
वह उसी नाव पर था।
पर अंत में,
उसने बिखरी चीज़ों को बुलाकर इकट्ठा किया।
घर खड़ा किया, घोड़े को बाँधा,
पेड़ लगाया, कौए को बैठाया।
जीवन-भर जिनको विदा किया था,
उन्हें एक-एक कर फिर बुलाया।
और उनके बीच,
एक मनुष्य को लौटाया।
थके क़दमों से,
झुकी पीठ से,
फिर भी घर की ओर।
प्रस्थान चित्रित करने वाले हाथ ने
वापसी चित्रित की।
जो भेजता था, वही स्वागत करने वाला बन गया।
प्रस्थान से वापसी तक,
उन दोनों के बीच एक जीवन था।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
