Artwork text
सूरज उग आया।
पति खेत की ओर जाता है,
पत्नी समुद्र की ओर जाती है।
पति बैल हाँककर खेत जोतता है।
पसीना पीठ भिगोता है।
पत्नी पानी में उतरती है।
शंख चुनती है,
अबालोन निकालती है।
एक धरती पर,
एक समुद्र में।
एक ही आकाश के नीचे
एक ही मन से दिन को कंधे पर उठाते हैं।
उस पसीने से बच्चा बड़ा हुआ।
माता-पिता ने धरती और समुद्र से
एक-एक दिन खींचकर निकाला,
उसी पसीने से।
दुनिया का हर दिन
इसी तरह किसी को पालता रहा।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
चित्रकारजेजूजापानसियोलबिवोन (चांगदोकगुंग का गुप्त उद्यान)आधुनिक युगसमकालीन युगकलाललित कला
