Artwork text
काले आकाश के नीचे
सफ़ेद हवा मैदान को झाड़ती है।
सूखी घास के रंग के रास्ते पर
स्त्री और घोड़ा एक देह की तरह झुककर चलते हैं।
स्त्री पीठ पर पानी का घड़ा लिए है,
घोड़ा चुपचाप उसके साथ चलता है।
हवा कपड़े का किनारा खींचती है,
पाँव तले की राह मिटाती है,
फिर भी दोनों रुकते नहीं।
दूर एक फूस का घर।
छोटा और धुँधला,
पर लौटने की जगह अभी बची है।
घर लौटने का रास्ता
हवा थमने के बाद चलने का रास्ता नहीं।
थके शरीर से भी
अंत तक घर की ओर जाना है।
रास्ता टूटता-सा जुड़ता है,
और स्त्री और घोड़ा
उस पतली रेखा के साथ लौटते हैं।
घर की रोशनी अभी दूर हो,
तो भी उस ओर होना भर
क़दमों को जारी रखता है।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
