Artwork text
नाव लौट आई।
मनुष्य
नहीं लौटा।
खाली नाव
इस बात का एकमात्र प्रमाण है
कि मछुआरा इओदो तक पहुँच गया।
उस नाव को देखकर
कौआ रोता है।
रोने वाला कोई नहीं,
इसलिए पक्षी उसके बदले रोता है।
इओदो दिखाई नहीं देता।
बस लौट आई खाली नाव
उसके होने की
मौन गवाही देती है।
दुख की जगह से
कथा जन्म लेती है।
जो लौट न सके,
उन्हें कम से कम इस तरह
कहीं जीवित रखने के लिए।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
चित्रकारजेजूजापानसियोलबिवोन (चांगदोकगुंग का गुप्त उद्यान)आधुनिक युगसमकालीन युगकलाललित कला
