Artwork text
वह घोड़ा हमेशा वहाँ था। पत्थर की दीवार के पास, फूस की छत के किनारे। जैसे मेरे जन्म से पहले से हो।
खेत जोतते समय साथ-साथ चला, बच्चा रोता तो सिर मोड़कर देखा, बारिश आती तो एक ही छप्पर के नीचे साँस ली।
मैंने उसे कभी बाँहों में नहीं लिया। कभी नाम लेकर नहीं पुकारा।
फिर भी अजीब है। नहीं जानता था कि इतना दुखेगा।
रोज़ देखता था, इसलिए नहीं जानता था कि देख रहा हूँ। इतना पास था, इसलिए नहीं जानता था कि वह है।
इसीलिए जब चित्रित करने बैठता हूँ, तूलिका रुक जाती है। गाढ़ा चित्रित करूँ तो वह वह घोड़ा नहीं जिसे मैं जानता हूँ।
न चित्रित करूँ तो मानो वह इस संसार में था ही नहीं।
बहुत देर हिचककर उसे धुँधला चित्रित किया। मानो पृष्ठभूमि में घुल रहा हो। न पूरा उपस्थित, न अनुपस्थित—बस उतना ही।
यही ठीक है। स्मृति की सघनता मूलतः ऐसी ही होती है।
जिसे सबसे अधिक प्रेम किया, वही सबसे धुँधला बचता है। जो सबसे लंबे समय तक पास रहा, उसका आकार सबसे पहले खो जाता है।
मैंने मिटाया नहीं। घोड़ा स्वयं मेरे भीतर चला आया। आँखों से बहुत गहराई तक उतर गया, इसलिए ठीक से दिखाई नहीं देता।
अब जब भी मैं साँस लेता हूँ, वह घोड़ा भी साँस लेता है।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
