Artwork text
पीले चित्र के बीच एक ऊँचा चीड़ खड़ा है। पास की ढलान पर एक घोड़ा झिलमिलाता है। दूर क्षितिज पर एक छोटी नाव तैरती है।
किसी ने इस पीले को देशज रंग कहा था। जेजू को चित्रित किया, इसलिए देशज कह दिया।
पर यह रंग किसी एक अंचल की मीठी आभा पर नहीं रुकता।
धूप में बरसों बीता, हवा में देर तक सूखा रंग। अभी-अभी पोता हुआ नहीं — देर तक जिया हुआ रंग। गर्मियों-भर खेत में काम करने वाले के हाथ की पीठ ऐसी होती है, समुद्री हवा में घिसी चौखट ऐसी होती है।
छोटे द्वीप का पीला है, पर उसके भीतर जो जलता है वह आंचलिक रंग नहीं, सहने का समय है।
ब्यून शिजी का पीला दृश्य का रंग होने से पहले, जीवन के घिसने से मिला रंग है।
इसीलिए इस रंग के सामने हर कोई अपने सहे हुए समय को याद करता है। जो जेजू को नहीं जानता, वह भी इस पीले के सामने देर तक खड़ा रह जाता है।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
