Artwork text
विस्तृत समुद्र के पास,
एक कोने में एक बूढ़ा लाठी टेककर चलता है।
उसके सामने की पहाड़ी सीधी नहीं।
चढ़ती है, झुकती है, फिर दूर तक चली जाती है।
एक मनुष्य का जिया हुआ रास्ता भी ऐसा ही है।
सीधा नहीं जा सका,
कभी मुड़कर,
कभी शरीर नीचा कर
यहाँ तक आया।
उस मुड़ी रेखा पर
एक जीवन का समय रखा है।
जीवन सीधा रास्ता खोजने का काम नहीं।
मुड़े रास्ते को अंत तक चलने का काम है।
समुद्र विस्तृत है, रास्ता संकरा।
फिर भी उसने रास्ता चुना।
क्योंकि चल सकना केवल रास्ते पर ही है।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
