कृतियाँ/FŪDO 025
डगमगाती डोंगी
The Wavering Skiff
मूल जानकारी
| संख्या | FŪDO 025 |
|---|---|
| शीर्षक | डगमगाती डोंगी흔들리는 조각배The Wavering Skiff |
| वर्ष | 1987 |
कृति का पाठ
पाठ: Byun Joung Hoon
सूखी घास के रंग का समुद्र पूरे चित्र में झुका है।
दूर बाएँ एक डोंगी बिंदु-सी डोलती है।
पर केवल नाव नहीं डोलती।
काली लहरें भी डोलती हैं, टीले पर का फूस का घर भी डोलता है,
घोड़े और मनुष्य का मन भी उसी हवा में डोलता है।
नाव समुद्र में है, मनुष्य और घोड़ा ज़मीन पर।
अलग-अलग जगह हैं, पर एक ही बेचैनी में हैं।
मनुष्य नाव को थाम नहीं सकता,
घोड़ा उस डोल को रोक नहीं सकता।
कुछ किया नहीं जा सकता।
इसलिए एक काम बचता है।
देखने का काम।
फूस का घर देह नीची करता है,
घोड़ा मनुष्य के पास खड़ा होता है,
मनुष्य अंत तक समुद्र से आँख नहीं हटाता।
सहना डोलना बंद हो जाना नहीं।
दूर के अस्तित्व के डोल को अपने मन में साथ सहते हुए,
अंत तक दृष्टि न हटाना है।
डोलती डोंगी समुद्र की छोटी नाव भी है,
और मनुष्य के भीतर डोलता एक जीवन भी।
संसार चौड़ा है, नाव छोटी है।
पर उस एक छोटे अस्तित्व के कारण,
ज़मीन की हर चीज़ चुपचाप साँस रोक लेती है।





