Artwork text
सूखी घास के रंग का समुद्र पूरे चित्र में झुका है।
दूर बाएँ एक डोंगी बिंदु-सी डोलती है।
पर केवल नाव नहीं डोलती।
काली लहरें भी डोलती हैं, टीले पर का फूस का घर भी डोलता है,
घोड़े और मनुष्य का मन भी उसी हवा में डोलता है।
नाव समुद्र में है, मनुष्य और घोड़ा ज़मीन पर।
अलग-अलग जगह हैं, पर एक ही बेचैनी में हैं।
मनुष्य नाव को थाम नहीं सकता,
घोड़ा उस डोल को रोक नहीं सकता।
कुछ किया नहीं जा सकता।
इसलिए एक काम बचता है।
देखने का काम।
फूस का घर देह नीची करता है,
घोड़ा मनुष्य के पास खड़ा होता है,
मनुष्य अंत तक समुद्र से आँख नहीं हटाता।
सहना डोलना बंद हो जाना नहीं।
दूर के अस्तित्व के डोल को अपने मन में साथ सहते हुए,
अंत तक दृष्टि न हटाना है।
डोलती डोंगी समुद्र की छोटी नाव भी है,
और मनुष्य के भीतर डोलता एक जीवन भी।
संसार चौड़ा है, नाव छोटी है।
पर उस एक छोटे अस्तित्व के कारण,
ज़मीन की हर चीज़ चुपचाप साँस रोक लेती है।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
