Artwork text
लहरें ऊँची हैं, हवा तेज़ है।
फूस का घर नीचा होता है, पेड़ डाल खोता है, घोड़ा सिर झुकाता है।
हर एक ने कुछ खोया। छत की ऊँचाई, एक डाल, गर्दन की अकड़।
पर सब अब भी अपनी जगह हैं।
सहना बिना घाव के डटे रहना नहीं। थोड़ा-थोड़ा अपने को देते हुए भी अंत तक न मिटना है।
देर तक जिए मनुष्य का चेहरा ऐसा होता है। खोए हुए के निशान होते हैं, और उन निशानों के बीच अब भी वह मनुष्य होता है।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
चित्रकारजेजूजापानसियोलबिवोन (चांगदोकगुंग का गुप्त उद्यान)आधुनिक युगसमकालीन युगकलाललित कला
