Artwork text
अकेले रहना संसार से कट जाना नहीं।
हवा के साथ साँस लेना है। पेड़ के साथ झुकना है। दूर होती नाव को देखते हुए अपनी जगह पर टिके रहना है।
पास मनुष्य नहीं, तो कुछ भी नहीं — ऐसा नहीं। सुबह की धूप आती है, दोपहर की हवा आती है, साँझ का जल-रंग आता है। अकेला मनुष्य इनमें से एक को भी बहने नहीं देता।
एकांत किसी के न होने का ख़ाली स्थान नहीं।
वह जगह है जहाँ मनुष्य अपने-आप के साथ गहराई से ठहरता है।
भीड़ में जो अपना-आप खो गया था, उसे अकेली जगह में फिर मिल लेता है।
Key context
ब्युन शी-जी आधुनिक और समकालीन कोरियाई चित्रकार थे, जिन्होंने जेजू के Fūdo को पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अस्तित्व की शर्त के रूप में चित्रित किया। एकांत, प्रतीक्षा, हवा और सूखी घास का रंग उनकी कला में स्थानीयता और विश्वता को जोड़ने वाला ग्लोकल कोरियाई आधुनिकतावाद रचते हैं।
चित्रकारजेजूजापानसियोलबिवोन (चांगदोकगुंग का गुप्त उद्यान)आधुनिक युगसमकालीन युगकलाललित कला
